परीक्षा के तनाव को कैसे दूर करें ? बच्चों के लिये परीक्षा का तनाव आजकल गंभीर समस्या बनता जा रहा है।

Exam-Stress

परीक्षा के तनाव को कैसे दूर करें ? बच्चों के लिये परीक्षा का तनाव आजकल गंभीर समस्या बनता जा रहा है।

परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन :
              यह वर्ष का वह समय है, जिसमें परीक्षाएं पास आ रही हैं, यह समय छात्रों और माता-पिता को समान रूप से डराता है। परीक्षा के समय माता-पिता और छात्र दोनों के चेहरे पर तनाव, चिंता और दबाव साफ रूप से दिखता है। माता-पिता अपने बच्चों के लिये ट्यूशन टीचर, सख्त समय सारणी और शिक्षाविदों के झुंड के चारों ओर घूमना शुरू कर देते हैं।
परीक्षा का मतलब :
              पुराने जमाने में परीक्षा का इतना महत्व नहीं होता था। हमारे माता-पिता ने परीक्षा समय के दौरान ना कभी इतना तनाव और ना कभी इतना दबाव महसूस किया था। परंतु आज के माहौल में दुनिया कितनी बदल गई है की परीक्षा और अंक के आधार पर ही अच्छी नौकरी या अच्छा जीवन मिलता है। आजकल जब भी कोई भी छात्र या माता-पिता परीक्षा का नाम सुनते हैं तो उनके दिमाग में परीक्षा संबंधित निम्नलिखित ख्याल आते हैं :-
परीक्षा मतलब कष्ट , चिंता , घबराहट , तनाव ,फिक्र,दबाव,सिर दर्दी
 
परीक्षा में तनाव के कारण:
             परीक्षा समय के दौरान एक छात्र ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार तनाव का शिकार हो जाता है। परीक्षा समय के दौरान तनाव के अलग-अलग कारण होते हैं, जिनमें से कुछ कारण इस प्रकार है:-
अच्छे अंक लाने का दबाव , माता पिता की अवास्तविक उम्मीदें ,प्रतिस्पर्धा,दूसरों से तुलना ,पीछे छूट जाने का डर ,अस्वीकार होने का डर , माता-पिता, भाई-बहन, अध्यापक द्वारा मजाक उड़ाना

परीक्षा समय में तनाव का असर :
             आजकल समाज और वातावरण कुछ इस प्रकार बदल चुका है कि ज्यादा फोकस पढ़ाई और अच्छे अंक लाने पर दिया जाता है। इस कारण एक छात्र अपनी पढ़ाई में मन लगाकर ध्यान नहीं दे पाता जिससे उसकी जिंदगी में तनाव पैदा होता है। इस तनाव की वजह से छात्र में मानसिक और शारीरिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं, जो कि इस प्रकार के हैं :- पेट खराब होना ,उल्टी आना ,पेचिश , नींद की कमी , स्मृति खो जाना ,  भूख मिट जाना या उसकी कमी बीमारी , घबराहट ,कम आत्मविश्वास ,एकाग्रता की कमी , डिप्रेशन ,आत्महत्या 

परीक्षा के तनाव का प्रबंधन :-
a) माता पिता के लिए सलाह  :-
             आजकल जैसे ही परीक्षाएं पास आती है, माता-पिता और बच्चों को समान रूप से तनाव महसूस होता है। इसका मूल कारण परिवार पर समाज का दबाव है कि बच्चों को बेहतर प्रदर्शन करना है, दूसरों के बच्चों से आगे निकलना है, भले ही वह बच्चा प्रक्रिया में कोई उपयोगी कौशल नहीं दिखा रहा हो। माता पिता को यह समझना चाहिए कि परीक्षा ही सब कुछ नही है। बच्चा बहुत बेहतर कर सकता है, अगर उसे अपने हितों को दिखाने के लिए मंच दिया जाता है, ना की उसकी क्षमताओं को सिर्फ तथ्यों और आंकड़ों को याद कर, उन्हें परीक्षा में लिखा जाए।
              यदि आपको अपने बच्चे को तनाव से बचाना है या उसकी जिंदगी में तनाव को कम करना है, तो निम्नलिखित कार्यावाही करें:-
बच्चें की बात बिना निर्णय के ध्यानपूर्वक सुनो ,उनके डर को समझो ,उनकी चिंताओं को सुनो ,उनकी पसंद और नापसंद को सुने, अपने बच्चे को गलती करने दें और उन्हें गलतियों से सीखने में मदद करें ,अपने बच्चों के ध्यान व स्थान को महत्व दे |

ना करें :-
अध्ययन के बारे में अपने बच्चों को हमेशा परेशान करना , बच्चों की कमजोरी के बारे में शिकायत करना , उनकी आलोचना करना ,दूसरों बच्चों से तुलना करना , उनको गाली देना या दंडित करना , उन पर दबाव डालना , अंक पर ध्यान केंद्रित करना

 बच्चों में परीक्षा तनाव के प्रबंधन में माता-पिता की एक बड़ी भूमिका है, खासतौर पर आज की दुनिया में प्रतियोगिता और बच्चों पर प्रदर्शन करने के दबाव में। सबकी अपनी-अपनी क्षमता और योग्यता होती है। माता पिता को अपने बच्चों की क्षमता को समझ कर, उन्हे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करनी चाहिए। यदि हर मां बाप अपने बच्चे को प्रोत्साहित करते हैं और उसकी क्षमता को समझ कर उसे हौसला देते हैं, तो हर बच्चा शौक से पढ़ाई करेगा और अपने लिए अच्छी जिंदगी बनाने में कामयाब रहेगा।

2) छात्रों के लिए सलाह :-
           एक छात्र होने के नाते यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप चीजों के परिपेक्ष में रहें। यदि यह महत्वपूर्ण है कि हर किसी को परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए, तो यह भी ध्यान में रखा जाए कि अंक ही एकमात्र न्यायादेश नहीं है कि आप कितना अच्छा या बुरा जीवन जिएंगे। इसलिए परीक्षाओं के दौरान तनाव को दूर करने के लिए छात्रों को निम्नलिखित सलाह का उपयोग करना चाहिए :-
अपने अध्ययन की योजना बनाएं 
परीक्षा की तारीख तक जितने भी दिन बाकी है, उसकी योजना करें, अपने दिन को कुछ इस प्रकार विभाजित करें :-
पढ़ाई                  -         12 घंटे 
नींद                     -         7 घंटे 
भोजन                 -         1 घंटा 
व्यायाम                -         1 घंटा 
ताजा होना            -         1 घंटा 
अन्य                     -         2 घंटा
 

    b)   अपने विषयों को निर्धारित करें   :-  कितना समय पढ़ाई में, कितना समय लिखने में, कितना समय संशोधन   करने में। यदि इस प्रकार अपने समय की योजना करते हैं तो तनाव का प्रबंधन कर सकते हैं।

  c)     अनुशासित कार्रवाई करें :-
             अपनी योजना पर कार्यवाही करें |
             अपनी प्रगति की समीक्षा करें |

 d)     विचलन से बचें  :-      पढ़ाई के दौरान अपना टीवी, लैपटॉप, फोन, इंटरनेट सब कुछ को एक तरफ रख कर छात्रों को सिर्फ और सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और यंत्रों का उपयोग आराम करने के दौरान करना चाहिए।

 e)     सकारात्मक दृष्टिकोण रखें :-      अपनी किसी अन्य छात्र से तुलना न करें। हमेशा अपने बारे में अच्छा सोचें, अच्छा करें और हमेशा अपने आपको अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता देखेंं।

 f)      स्वास्थ्य और भोजन पर ध्यान केंद्रित करें :-  सदैव पोस्टिक भोजन का सेवन करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें, हर दिन दूध पिएँ और फल खाए।

 g)     सही मात्रा में आराम करें :-   पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में छोटे समय के लिए आराम करें और परीक्षा समय में सुस्ती से बचने के लिए पर्याप्त रूप से नींद ले।
 h)    कठिन विषयों को पहले पढ़े, ताकि परीक्षा के समय संशोधन करने में दिक्कत ना आए।

3) एकाग्रता में सुधार के लिए व्यायाम:-
सफल होने के लिए एक छात्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह तनाव से मुक्त हैै? और पूर्ण रूप से एकाग्र है। जब वह आने वाली परीक्षाओं के लिए अध्ययन करने का प्रयास कर रहा है तो वह निम्नलिखित युक्ति का उपयोग कर सकता है :-
गहरी सांस ले ,अपने हाथों को रगड़े और आखों पर रगड़े ,योग ,संगीत सुनें , संशोधन करने के लिये तेजी से पढ़े ,अपनी जीत की कल्पना करें
जबकि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सफलता हर किसी को अच्छी लगती है, हालांकि यह आपके स्वास्थ्य और कल्याण की लागत पर नहीं होनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि आप तनाव में हैं तो अपने माता-पिता, शिक्षकों या दोस्तों से बात करें। अपने दिमाग पर अधिक दबाव ना डालें और सुनिश्चित करें कि आप इसे आराम दें और साथ ही अपने आप को भी आराम दें। अपने साथियों से बात करें और एक दूसरे को तनावपूर्ण माहौल से उबरने में मदद करें। आखिर में आप जो भी कार्य करते हैं, उसमें आनंद ले क्योंकि इसे सीखने की प्रक्रिया और अधिक सुखद हो जाएगी।

 

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